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पैरों में सुन्नपन के कारण: कब सामान्य है और कब डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है

पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी अक्सर नस पर थोड़ी देर दबाव पड़ने से होती है और अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन अगर यह बार-बार लौटे या लंबे समय तक रहे, तो इसके पीछे कमर की नस दबना (साइटिका, स्लिप डिस्क), डायबिटीज़, विटामिन B12 की कमी या कोई और कारण हो सकता है। अगर सुन्नपन के साथ पैरों में कमज़ोरी हो, पेशाब या शौच पर नियंत्रण न रहे, या जांघों के बीच और कूल्हों के आसपास संवेदना कम लगे, तो तुरंत इमरजेंसी में दिखाएं।

पैरों में सुन्नपन क्या होता है?

सुन्नपन (numbness) में पैर की संवेदना कम हो जाती है, यानी छूने, गर्मी या दर्द का एहसास कम महसूस होता है। इसके साथ अक्सर झुनझुनी, चुभन या जलन भी होती है। आम बोलचाल में इसे पैर सुन्न होना, पैर सो जाना या पैरों में झुनझुनी (pairon mein sunnpan, jhunjhuni) कहते हैं। चिकित्सा भाषा में इसे पेरेस्थीसिया (paraesthesia) कहा जाता है।

यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है। यह संकेत हो सकता है कि पैर की नस पर, या उस नस के रास्ते में कहीं (कमर, कूल्हे या पैर में) कोई समस्या है।

थोड़ी देर का सुन्नपन: कब चिंता की बात नहीं

पालथी मारकर या पैर मोड़कर देर तक बैठने, एक ही करवट सोने या तंग जूते-मोज़े पहनने से नस पर दबाव पड़ता है और खून का बहाव कुछ देर के लिए कम हो जाता है। इससे पैर सुन्न या झुनझुना हो जाता है। दबाव हटते ही यह कुछ मिनट में ठीक हो जाता है। कभी-कभार ऐसा होना आमतौर पर चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर पैरों में सुन्नपन बार-बार आता है या लगातार बना रहता है, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए [1]

पैरों में सुन्नपन के मुख्य कारण

1. कमर की नस पर दबाव

कमर की रीढ़ से निकलने वाली नसें पैरों तक जाती हैं। जब रीढ़ की किसी समस्या के कारण इनमें से कोई नस दबती या चिढ़ती है, तो सुन्नपन, झुनझुनी या दर्द कमर से पैर तक महसूस हो सकता है। आम कारण ये हैं:

  • साइटिका: कमर या कूल्हे से शुरू होकर पैर के पीछे या नीचे तक जाने वाला दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन। यह आमतौर पर एक ही पैर में होता है [1]।
  • स्लिप डिस्क या डिस्क बल्ज (L4-L5, L5-S1): डिस्क के बाहर निकलकर नस को दबाने से कमर दर्द के साथ पैर में सुन्नपन या कमज़ोरी आ सकती है।
  • स्पाइनल स्टेनोसिस: रीढ़ की नली संकरी होने पर चलने के दौरान पैरों में भारीपन, दर्द या सुन्नपन होता है, जो बैठने या आगे झुकने पर कम हो जाता है।
  • लंबर स्पॉन्डिलोसिस: उम्र के साथ कमर की हड्डियों और डिस्क के घिसने से नसों पर दबाव पड़ सकता है।

गर्दन की रीढ़ की गंभीर समस्या (सर्वाइकल मायलोपैथी) में कभी-कभी दोनों पैरों में सुन्नपन, अकड़न और चलते समय लड़खड़ाहट हो सकती है, अक्सर हाथों की दिक्कत के साथ। यह कम होता है, लेकिन इसकी जाँच ज़रूरी है।

2. डायबिटीज़ (मधुमेह)

लंबे समय तक ब्लड शुगर ज़्यादा रहने से पैरों की नसें ख़राब हो सकती हैं। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसमें आमतौर पर दोनों पैरों के पंजों में सुन्नपन, झुनझुनी या जलन शुरू होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ सकती है। संवेदना कम होने से पैर की चोट या छाले का पता नहीं चलता, इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों को रोज़ अपने पैर देखने चाहिए [2]।

3. विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 नसों को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है। इसकी कमी से हाथ-पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी हो सकती है [2]। B12 मुख्य रूप से पशु-आधारित भोजन में मिलता है, इसलिए जो लोग मांस, मछली और अंडे बहुत कम खाते हैं, उनमें कमी का जोखिम अधिक हो सकता है। दूध, दही, पनीर और अंडे में कुछ मात्रा मिलती है। कमी है या नहीं, यह ब्लड टेस्ट से ही पता चलता है। कुछ अन्य विटामिन की कमी भी नसों को प्रभावित कर सकती है [3]।

4. अन्य कारण

  • थायरॉइड की कमी (हाइपोथायरॉइडिज़्म), किडनी या लिवर की बीमारी: ये भी नसों को नुकसान पहुँचा सकती हैं [3]।
  • ज़्यादा शराब: सालों तक ज़्यादा शराब पीने से नसें ख़राब हो सकती हैं [2]।
  • कुछ दवाएं: कुछ दवाओं (जैसे कीमोथेरेपी) के साइड इफ़ेक्ट से सुन्नपन हो सकता है। अपनी दवा खुद बंद न करें, डॉक्टर से पूछें।
  • खून के बहाव की समस्या: पैरों की धमनियाँ संकरी होने पर चलने पर पिंडलियों में दर्द या सुन्नपन होता है, जो आराम करने पर ठीक हो जाता है। पैर ठंडे भी रह सकते हैं।
  • घबराहट में तेज़ साँस लेना: बहुत तेज़ साँस लेने (हाइपरवेंटिलेशन) से भी झुनझुनी हो सकती है [1]।
  • रेनॉड्स और अन्य नस की बीमारियाँ: ठंड में उंगलियों या पंजों का रंग बदलना और सुन्नपन रेनॉड्स का संकेत हो सकता है। मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी बीमारियाँ भी इसका कारण हो सकती हैं, लेकिन ये कम आम हैं [1]।

सुन्नपन के पैटर्न से क्या संकेत मिल सकता है

सुन्नपन का पैटर्न

संभावित कारण

एक पैर में, कमर दर्द के साथ, कमर से पैर के पीछे या नीचे तक

कमर की नस पर दबाव (साइटिका, स्लिप डिस्क)

चलने पर पैरों में भारीपन या सुन्नपन, बैठने या आगे झुकने पर आराम

स्पाइनल स्टेनोसिस

दोनों पैरों के पंजों से शुरू होकर धीरे-धीरे ऊपर की ओर

डायबिटीज़, B12 की कमी, शराब, थायरॉइड या किडनी की समस्या

चलने पर पिंडली में दर्द या सुन्नपन, आराम से ठीक, पैर ठंडे

पैरों में खून के बहाव की समस्या

कुछ मिनट में अपने आप ठीक हो जाए

बैठने या सोने के दौरान नस पर दबाव

दोनों पैरों में अकड़न, लड़खड़ाहट और हाथों में दिक्कत

गर्दन की रीढ़ की गंभीर समस्या, तुरंत जाँच कराएं

यह तालिका सिर्फ़ समझने के लिए है, निदान नहीं। सही कारण डॉक्टर की जाँच से ही पता चलता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

इमरजेंसी: तुरंत अस्पताल जाएं। अगर पैरों के सुन्नपन या कमर दर्द के साथ इनमें से कोई भी लक्षण नया शुरू हुआ हो या बढ़ रहा हो:

  • गुदा, जननांग या जांघों के बीच और कूल्हों के आसपास सुन्नपन या संवेदना में कमी (जैसे शौच के बाद साफ़ करते समय एहसास न होना) [4]।
  • पेशाब शुरू करने या रोकने में दिक्कत, पेशाब का एहसास न होना, या अनजाने में पेशाब या शौच निकल जाना [4]।
  • एक या दोनों पैरों में तेज़ी से बढ़ती कमज़ोरी।
  • अचानक एक तरफ़ चेहरे, हाथ या पैर में सुन्नपन या कमज़ोरी, या बोलने में दिक्कत। यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।

पहले तीन लक्षण कॉडा इक्वाइना सिंड्रोम (cauda equina syndrome) के संकेत हो सकते हैं। यह दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, जिसमें रीढ़ के निचले हिस्से की नसें दब जाती हैं। देरी होने पर स्थायी नुकसान हो सकता है, इसलिए इंतज़ार न करें [4][5]

जल्द डॉक्टर को दिखाएं:

  • सुन्नपन जो कई हफ़्तों से बना हुआ है या बढ़ रहा है।
  • पैर में कमज़ोरी, पैर घसीटना या बार-बार ठोकर लगना।
  • चोट या गिरने के बाद सुन्नपन।
  • डायबिटीज़ में सुन्नपन के साथ पैर का ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो।
  • सुन्नपन के साथ बुखार या बिना कारण वज़न का घटना।

डॉक्टर कौन सी जाँच करा सकते हैं

  • पैर पर दबाव हटाएं, बैठने या लेटने की स्थिति बदलें और कुछ देर हल्का चलें।

  • तंग जूते-मोज़े न पहनें और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें।

  • डायबिटीज़ है तो रोज़ पैर देखें (कट, छाले, लाली), और नहाने के पानी का तापमान हाथ से जाँचें।

  • सुन्न पैरों पर हीटिंग पैड या बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल न करें, क्योंकि जलने का पता नहीं चलता [2]।

  • बिना जाँच के नर्व की दवा या B12 की गोली अपने मन से न लें। इससे असली कारण छिप सकता है और इलाज में देरी हो सकती है।

इलाज क्या है?

इलाज इस पर निर्भर करता है कि सुन्नपन का कारण क्या है [1]।

  • कमर की नस दबने पर: डॉक्टर की सलाह से दवा, फिज़ियोथेरेपी और सही व्यायाम। कुछ मामलों में, जब नस पर दबाव गंभीर हो या कमज़ोरी बढ़ रही हो, तो स्पाइन विशेषज्ञ सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

  • डायबिटीज़ में: ब्लड शुगर का नियंत्रण और पैरों की देखभाल।

  • B12 की कमी में: डॉक्टर की सलाह से B12 की गोली या इंजेक्शन [2]।

  • शराब या दवा से: डॉक्टर की सलाह से बदलाव।

बचाव के उपाय

  • सही तरीके से बैठें और हर 30 से 60 मिनट में उठकर थोड़ा चलें।

  • भारी सामान उठाते समय कमर नहीं, घुटने मोड़ें।

  • ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें और नियमित जाँच कराएं।

  • संतुलित आहार लें, और अगर आप शाकाहारी हैं तो डॉक्टर से B12 की जाँच के बारे में पूछें।

  • शराब कम करें और वज़न संतुलित रखें।

  • रोज़ हल्की सैर करें, अगर डॉक्टर ने मना न किया हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पैरों में सुन्नपन किस विटामिन की कमी से होता है? सबसे आम तौर पर विटामिन B12 की कमी से। कुछ अन्य विटामिन की कमी भी नसों को प्रभावित कर सकती है। कमी है या नहीं, यह ब्लड टेस्ट से पता चलता है, इसलिए जाँच के बाद ही डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें।

क्या कमर की समस्या से पैर सुन्न हो सकते हैं? हाँ। साइटिका, स्लिप डिस्क या स्पाइनल स्टेनोसिस में कमर की नस दबने से पैर में सुन्नपन, झुनझुनी या कमज़ोरी हो सकती है। अक्सर इसके साथ कमर दर्द होता है, पर हमेशा नहीं।

सिर्फ़ एक पैर सुन्न क्यों होता है? एक पैर का सुन्नपन अक्सर उसी तरफ़ की किसी नस पर दबाव (जैसे कमर में) या स्थानीय दबाव से होता है। अगर यह बार-बार हो या बना रहे, तो जाँच कराएं। डायबिटीज़ और B12 की कमी में आमतौर पर दोनों पैर प्रभावित होते हैं।

रात में पैर सुन्न क्यों हो जाते हैं? एक ही करवट सोने या पैर मोड़कर सोने से नस पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन अगर रोज़ रात को ऐसा हो या नींद टूटे, तो डायबिटीज़, B12 की कमी या नस दबने जैसे कारणों की जाँच कराएं। सोने की सही पोज़िशन पर हमारा लेख (अंग्रेज़ी में) पढ़ें।

क्या सुन्नपन अपने आप ठीक हो जाता है? थोड़ी देर का सुन्नपन दबाव हटने पर ठीक हो जाता है। लेकिन लंबे समय का सुन्नपन अक्सर किसी कारण की ओर इशारा करता है, और कारण का इलाज होने पर ही आराम मिलता है। जितनी जल्दी जाँच हो, उतना अच्छा।

सुन्नपन में किस डॉक्टर को दिखाएं? शुरुआत में किसी फिज़िशियन या जनरल डॉक्टर को दिखा सकते हैं, जो शुगर, B12 और थायरॉइड जैसी जाँच बता सकते हैं। अगर कमर दर्द या पैर में कमज़ोरी साथ हो, तो स्पाइन विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएं।

The Spine Foundation: कैसे मदद कर सकता है

अगर आपके पैरों में सुन्नपन लंबे समय से है, बढ़ रहा है, या कमर दर्द और कमज़ोरी के साथ है, तो सही जाँच और निदान ज़रूरी है। द स्पाइन फाउंडेशन देश भर में स्पाइन केयर और कैंप चलाता है। अपने पास का स्पाइन केयर सेंटर देखें, या हमारी टीम से संपर्क करके आने वाले कैंप के बारे में पूछें।

Medical Disclaimer

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह, जाँच या इलाज का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के बारे में हमेशा योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

References

  1. NHS (via NI Direct). Pins and needles. nidirect.gov.uk/conditions/pins-and-needles
  2. NHS Fife. Peripheral neuropathy: patient advice. nhsfife.org
  3. Gloucestershire Hospitals NHS Foundation Trust. Painful peripheral neuropathy. gloshospitals.org.uk
  4. NHS Greater Glasgow and Clyde. Cauda equina syndrome: important warning signs. rightdecisions.scot.nhs.uk (PDF)

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